Friday, 21 December 2012

पंचायत महिला शक्ति अभियान शुरू, मांगपत्र पेश


झारखंड की महिला पंचायत प्रतिनिधियों ने अपने अधिकारों के लिए राज्यस्तरीय अभियान शुरू कर दिया है। इसका नाम है- पंचायत महिला शक्ति अभियान। 
इसके लिए राज्यस्तर पर महिलाओं की एक कोर कमेटी बनायी गयी है। इसका पहला प्रमंडल स्तरीय सम्मेलन 14 दिसंबर 2012 को हजारीबाग में हुआ। इसमें उपमुख्यमंत्री श्री सुदेश कुमार महतो भी शामिल हुए। इस सम्मेलन में झारखंड की महिला पंचायत प्रतिनिधियों ने अपना एक मांगपत्र पेश किया। जल्द ही रांची में राज्यस्तरीय सम्मेलन में उसे मांगपत्र पर चर्चा होगी।
पंचायत महिला शक्ति अभियान के संबंध में विस्तृत जानकारी, मांग पत्र, कोर कमेटी की सदस्यों की सूची के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें-
पंचायत महिला शक्ति अभियान
महिला पंचायत मांग-पत्र
Women Panchayat Charter

Thursday, 13 December 2012

परिवार-सरकार एक साथ संभाल रहीं महिला पंचायत प्रतिनिधि


रामगढ़: पंवायत चुनाव ने महिलाओं को घर की चारदिवारी से निकलकर बड़ी जिम्मेवारियां संभालने का सुनहरा अवसर प्रदान किया है। पहली बार बड़ी संख्या में चुनकर आयीं झारखंड की महिला पंचायत प्रतिनिधियों ने अपनी योग्यता और नेतृत्व क्षमता का एहसास भी कराना शुरू कर दिया है। सबसे बड़ी बात यह है कि इन महिला प्रतिनिधियों पर दोहरी जिम्मेवारी आ गयी है। उन्हें पंचायत के जरिये राज्य की तीसरी सरकार को संभालने के साथ ही अपने घर-परिवार को संभालने का दायित्व भी है। आम तौर पर पुरुष जनप्रतिनिधियों को कोई बड़ा दायित्व मिलने के बाद पारिवारिक दायित्वों से कमोबेश मुक्ति मिल जाती है। लेकिन महिलाओं के लिए ऐसा शायद ही संभव हो पाता है।
इसका एक उदाहरण है यह तसवीर। रामगढ़ जिला समाहरणालय में 08-12-12 को महिला पंचायत प्रतिनिधियों की एक कार्यशाला में एक प्रतिनिधि अपने बच्चे को भी संभाल रही हैं। आखिर वह किसके भरोसे घर पर छोड़ दें अपने लाडले को?
महिलाओं के अपसारण या वुमेन ट्रेफिकिंग को रोकने में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका पर यूएन वुमेन तथा राज्य महिला आयोग द्वारा यह कार्यशाला आयोजित की गयी थी। दीया सेवा संस्थान की सीता स्वांसी एवं बैजनाथ कुमार के नेतृत्व में हुई इस कार्यशाला में झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स संेटर के राज्य समन्वयक डाॅ. विष्णु राजगढि़या ने महिला अपसारण रोकने में मीडिया एवं आरटीआइ की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। जिला पंचायत पदाधिकारी ने पंचायत प्रतिनिधियों के अधिकारों पर प्रशिक्षण दिया।

कई बार ऐसे प्रशिक्षणों में सहभागियों की वांछित संख्या का अभाव दिखता है। लेकिन इस कार्यशाला में शामिल होने को लेकर महिला प्रतिनिधियों का उत्साह इस बात से समझा जा सकता है कि आयोजकों ने तीस प्रतिभागियों के लिए व्यवस्था की थी जबकि कार्यक्रम प्रारंभ होने से पहले ही लगभग सत्तर प्रतिनिधि आ चुकी थीं। ऐसे में प्रतिभागियों के बैठने के लिए अतिरिक्त कुरसी का इंतजाम करना वहां मौजूद पदाधिकारियों अथवा कर्मचारियों के लिए संभव नहीं हो पर रहा था। इसके कारण कुछ महिला प्रतिनिधियों में निराशा की भी स्थिति देखी गयी। इस संकट का पता लगने पर एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता विक्की कुमार ने पहल की और एक टेंट हाउस से 30-40 कुरसियां लाकर सभी प्रतिभागियों को कार्यशाला में शामिल होने की सुविधा प्रदान की।


14 दिसंबर को हजारीबाग में महिला पंचायत प्रतिनिधि सम्मेलन हेतु संदेश


सुदेश कुमार महतो

उपमुख्यमंत्री सह विभागीय मंत्री
ग्रामीण विकास विभाग एवं पंचायती राज विभाग
झारखंड सरकार

झारखंड की पंचायतों की समस्त निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों को जोहार। राज्य के ग्रामीण विकास में पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका है और मुझे यह कहते हुए प्रसन्नता हो रही है कि झारखंड की 56 प्रतिशत महिला पंचायत प्रतिनिधियों के प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव हमें दिखायी देने लगा है।
इस क्रम में ‘पंचायत महिला एवं युवा सशक्तिकरण अभियान’ से हमें काफी उम्मीदें हैं। भारत सरकार ने देश की निर्वाचित महिला पंचायत प्रतिनिधियों के लिए वर्ष 2007 में यह अभियान प्रारंभ किया था। इसका उद्देश्य महिला पंचायत प्रतिनिधियों को अपने अधिकारों एवं कत्र्तव्यों के प्रति जागरूक बनाना है। इसके तहत महिला प्रतिनिधियों को अपनी आवश्यकताओं एवं चुनौतियों के संदर्भ में राज्य सरकार से अपेक्षाओं को चिन्हित करते हुए एक घोषणा-पत्र बनाना है।
झारखंड में हमने कोर कमिटि बनाने तथा उन्मुखीकरण कार्यक्रम के साथ ही इस अभियान की शुरूआत कर दी है। राज्य एवं प्रमंडल स्तरीय सम्मेलनों तथा कोर कमिटि की बैठकों के माध्यम से इस अभियान को सफल बनाने हुए राज्य में महिला पंचायत प्रतिनिधियों की क्षमता-वृद्धि करते हुए उन्हें अपने महत्वपूर्ण दायित्व के अनुकूल सक्षम बनाना ही हमारा लक्ष्य है।
मुझे पूरा भरोसा है कि यह अभियान रंग लायेगा और पंचायतों के माध्यम से राज्य में विकास की नयी रोशनी फैलेगी।
आप सबको मेरी शुभकामना।

पंचायत महिला शक्ति अभियान


पंचायत महिला शक्ति अभियान का उद्देश्य महिला नेतृत्व को निम्नलिखित कार्यों के लिए एक साथ लाना है;

  •  निर्वाचित महिला पंचायत प्रतिनिधि के बतौर अपनी समस्याओं को अभिव्यक्त करना।
  •  अपने सशक्तिकरण हेतु संस्थागत प्रणाली विकसित करने संबंधी मुद्दों पर चर्चा करना।
  • नीतियों व समर्थन की मुख्यधारा में शामिल किए जाने हेतु अपने मुद्दों का एक मांग पत्र बनाना ताकि राज्य एवं त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं की व्यवस्था द्वारा अपनाई गई विकास प्रक्रिया के माध्यम से उनकी चिंताओं का समाधान किया जा सके।
  •  ऊपर से नीचे के क्रम में जिला एवं मंडल पर चयनित महिला प्रतिनिधियों को मिला कर चयनित महिला प्रतिनिधियों के पदाधिकारियों का एक संगठन बनाना । 
  • कोर कमिटि महिला सम्मेलन के आयोजन में मदद करेगी। फिर उनकी समस्याओं को समझ कर उस पर चर्चा कर पंचायत राज की निर्वाचित जन प्रतिनिधियों के लिए एक मांग पत्र तैयार करने में मदद करेगी। 
  • राज्य स्तर पर बनाये गये संघ का लक्ष्य होगा- पंचायत की निर्वाचित महिला जन प्रतिनिधियों के लिए एक राज्य संसाधन केन्द्र के रूप में काम करना। 
  • राज्य एवं प्रमण्डल स्तर पर आयोजित होने वाले सम्मेलनों की मुख्य निष्पत्ति प्रस्तावित मांग पत्र पर चर्चा कर उसे अंतिम रूप देने का होगा। 

कोर कमिटि का गठन
प्रत्येक राज्य में निर्वाचित महिला जन प्रतिनिधियों, समाजकर्मियों एवं गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों को लेकर एक कोर समिति का गठन किया जायेगा।
कोर समिति महिला जन प्रतिनिधियों के लिए उनकी समस्याओं एवं जिम्मेवारियों को देख समझ कर एक मांग पत्र तैयार करेगी।
मांग पत्र राज्य पंचायत महिला शक्ति अभियान को राज्य में क्रियान्वित करने के लिए एक रोड मैप उपलब्ध करायेगी।
कोर कमिटि की भूमिका
राज्य सम्मेलन के आयोजन मे सहयोग।
निर्वाचित महिला जन प्रतिनिधियों के लिए संघ के निर्माण में मदद।
कोर समिति दो बैठक कर संघ के कार्य पद्धति को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करेगी।
एक बार जब संघ सुचारू रूप से काम करना प्रारंभ कर देगा तो समिति की जिम्मेवारी समाप्त हो जायगी एवं यह समिति भी समाप्त हो जायेगी।
सम्मेलन
दो दिवसीय राज्य स्तरीय सम्मेलन में पंचायत राज संस्थानों की निर्वाचित महिला जन प्रतिनिधि उन मुद्दों पर चर्चा करेंगी जो उन्हे एक निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में काम करने में बाधा उत्पन्न करती है।
पहले दिन सिर्फ जिलों से आयी महिला मुखिया अपनी बातें रखेंगी।
दूसरे दिन महिला प्रमुख और जिला परिषद की अध्यक्षा भी चर्चा में शामिल हो जायेंगी।
सम्मेलन की निष्पति / परिणाम
राज्य महिला मांग पत्र को अंतिम रूप प्रदान करना।
महिला निर्वाचित महिला जन प्रतिनिधियों में से संघ के पद धारकों का चयन कर राज्य स्त्तरीय संघ की स्थापना करना।
राज्य संघ
संघ के पदधारकों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों को भी उचित स्थान मिलना चाहिए।
संघ किसी भी अनिश्चय की स्थिति में निर्वाचित महिला जन प्रतिनिधियों को उचित मार्गदर्शन प्रदान करेगा।
संघ सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट की तहत  एक सोसाइटी के रूप में पंजीकृत होगा।
संघ की भूमिका
लिंग के आधार पर महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव ,बच्चों के शोषण, घरेलू हिंसा अस्पृश्यता एवं ऐसे ही अन्य सामाजिक मुद्दों के खिलाफ आवाज उठाना।
निर्वाचित महिला जन प्रतिनिधियों द्वारा पारित प्रस्ताव को सरकार तक पहुंचाना।
सरकारी कार्यक्रमों मे निर्वाचित महिला जन प्रतिनिधियों का प्रतिनिधित्व करना।
संघ एवं इसकी निर्वाचन प्रक्रिया को सशक्त करना।
निर्वाचित महिला जन प्रतिनिधियों को जानकारी एवं काम के दौरान आने वाली समस्याओं में मदद करना।

Thursday, 15 November 2012

पंचायत रिसोर्स डायरी


Jharkhand Panchayat Women Resource Centre
SIRD, South Campus, Hehal, Ranchi- 834005, email - jpwrc4@gmail.com
विषय - पंचायत रिसोर्स डायरी के प्रकाशन हेतु डाटा भेजने संबंधी आग्रह। 

महाशय,
विदित है कि झारखंड में महिला पंचायत प्रतिनिधियों के सशक्तिकरण के लिए राज्य ग्रामीण विकास संस्थान (सर्ड, ग्रामीण विकास विभाग, झारखंड सरकार), यूनिसेफ (झारखंड), मंथन युवा संस्थान तथा झारखंड राज्य महिला आयोग के संयुक्त तत्वावधान में झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर की स्थापना की गयी है। इसका कार्यालय राज्य ग्रामीण विकास संस्थान, साउथ कैंपस, हेहल, रांची में स्थित है। झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर का विवरण http://jpwrc.blogspot.in पर देखा जा सकता है।  

वर्तमान में केंद्र एव राज्य सरकार के ग्रामीण विकास विभाग एवं पंचायती राज विभाग के साथ ही अन्य सरकारी विभागों/उपक्रमों की विभिन्न योजनाओं के अलावा निजी क्षेत्र द्वारा कारपोरेट सोशल रिस्पोन्सिबिलिटी के तहत पंचायत सशक्तिकरण संबंधी विभिन्न प्रयास किये जा रहे हैं। राजीव गांधी पंचायत सशक्तिकरण अभियान, पंचायत महिला एवं युवा शक्ति अभियान तथा पंचायत इमपावरमेंट एकाउंटिबिलिटी इन्सेंटिव स्कीम (Rajiv Gandhi Panchayat Sashaktikaran Abhiyan; Panchayat Mahila Evam Yuva Shakti Abhiyan; Panchayat Empowerment Accountability Incentive Scheme)  इत्यादि कार्यक्रमों को राज्य में सफलतापूर्वक लागू किया जा रहा है।

इस दिशा में स्वयंसेवी संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका के आलोक में झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर द्वारा राज्य में पंचायती राज संबंधी प्रशिक्षण तथा क्रियान्वयन से संबंधित स्वयंसेवी संस्थाओं की जानकारी सहज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक पंचायत रिसोर्स डायरी का प्रकाशन प्रस्तावित है। 

अनुरोध है कि उक्त डायरी हेतु अपनी संस्था संबंधी विवरण निर्धारित प्रपत्र में 26 नवम्बर 2012 तक भेजने का कष्ट करना चाहेंगे। साथ में संस्था संबंधी कोई अनुलग्नक लगाने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन अगर आपकी संस्था ने पंचायती राज संबंधी IEC material विकसित किये हों या सक्सेस स्टोरीज/ बेस्ट प्रेक्टिसेस हो तो उन्हें भेजना सार्थक होगा।

विवरण ई-मेल द्वारा jpwrc4@gmail.com पर भेजा जा सकता है। विवरण हेतु निर्धारित प्रपत्र संलग्न है।
धन्यवाद एवं शुभकामनाओं सहित


डा. विष्णु राजगढि़या
राज्य समन्वयक 
झारखण्ड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर
Jharkhand Panchayat Women Resource Centre
SIRD, South Campus, Hehal, Ranchi- 834005
email - jpwrc4@gmail.com 


Format for Panchayat Resource Diary (for JPWRC)

S.L
Particulars
1
Name of the organization
2
Year of establishment
3
Name of the contact person
4
Address for communication 
5
Email address & phone Numbers 
6
Website/Blog address
7
Operational areas
8
Brief details regarding experience and works on Panchayati Raj
9
Brief detail if any IEC material has been developed on Panchayati Raj
10
Success stories/ good practices on Panchayati Raj (if any)

Sunday, 2 September 2012

घाटशिला में पंचायत महिला प्रतिनिधियों का नेटवर्क

पूर्वी सिंहभूम में यूनिसेफ की पहल से पंचायत महिला प्रतिनिधियों का नेटवर्क गतिशील है तथा इसके माध्यम से महिला एवं पंचायत सशक्तिकरण के काम में प्रगति हो रही है। 29 अगस्त को घाटशिला प्रखंड प्रमुख कार्यालय में प्रखंड समिति श्रुति देवगम के साथ मौजूद पंचायत महिला प्रतिनिधि सपना, छाया, आदरी एवं पार्वती

Saturday, 21 July 2012

झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर

सर्ड, यूनिसेफ, झारखंड राज्य महिला आयोग, मंथन युवा संस्थान की संयुक्त परियोजना


झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर का उद्देष्य -

महिला पंचायत प्रतिनिधियों का सषक्तिकरण - झारखंड के लिए पंचायत राज मानो एक बिलकुल नयी चीज है। लगभग 32 साल के बाद वर्ष 2010 में पंचायत चुनाव हुए। इतने लंबे अंतराल के कारण आज की पीढ़ी के पास पंचायत राज की समुचित जानकारी का अभाव है।

झारखंड में पंचायती राज की एक खासियत है। यहां पंचायत के लगभग 57 प्रतिषत पदों पर महिलाओं ने सफलता पायी है। झारखंड पंचायत राज कानून में महिलाओं के लिए 50 प्रतिषत आरक्षण है। इससे उत्साहित महिलाओं ने अनारक्षित क्षेत्रों में भी सफलता पायी। उन्होंने यह भी एहसास करा दिया कि अब वह किसी भी मामले में पीछे रहने वाली नहीं।

इस भारी सफलता के बावजूद महिला पंचायत प्रतिनिधियों के सामने कई मुष्किलें हैं। कुछ महिला प्रतिनिधियों के लिए उनका शैक्षणिक, सामाजिक और राजनीतिक स्तर बाधा बनता है। कुछ महिला प्रतिनिधि आर्थिक रूप से काफी निम्न स्तर से आयी हैं। ऐसी महिला प्रतिनिधियों की बड़ी संख्या है जिन्हें सामाजिक पिछड़ेपन और पितृसत्ता व्यवस्था के कारण आज भी स्वतंत्र निर्णय लेने और घर से बाहर निकलने में मुष्किल आती है। ऐसे में परिवार के पुरुषों पर उनकी निर्भरता बढ़ जाती है। कुछ महिला प्रतिनिधियों को पंचायती राज कानून से मिले अधिकारों तथा अपने कर्तव्यों के बारे में पूरी तरह समझना अभी बाकी है। कुछ महिला प्रतिनिधियों को सरकारी योजनाओं तथा प्रषासनिक कामकाज के तरीकों की पूरी जानकारी नहीं। इसके कारण अन्य लोगों पर निर्भरता तथा अपना दायित्व पूरी तरह नहीं निभा पाने जैसी समस्याएं आती हैं।

इसलिए, पंचायती राज के सफल क्रियान्वयन एवं झारखंड के सर्वांगीण ग्रामीण विकास के लिए महिला पंचायत प्रतिनिधियों का सषक्तिकरण व उन्हें समुचित संसाधन उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।
इसी काम में सबका सहयोग लेना ही झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर का उद्देष्य है। यह केंद्र रांची के हेहल स्थित राज्य ग्रामीण विकास संस्थान (साउथ कैंपस, काजू बगान) में स्थित है। यह रांची के पिस्का मोड़ से पंडरा जाने वाले रास्ते के बीच है।

प्रमुख कार्य एवं गतिविधियां

झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर की प्रमुख गतिविधियां इस प्रकार हैं-

1. झारखंड में पंचायती राज के क्रियान्वयन तथा ग्रामीण विकास से जुड़ी सभी सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं, कारपोरेट घरानों, शोधकर्ताओं एवं शैक्षणिक संस्थाओं, पंचायत प्रतिनिधियों व अन्य जनप्रतिनिधियों, सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों एवं मीडियाकर्मियों के साथ संवाद एवं नेटवर्क बनाकर एक राज्यस्तरीय संसाधन केंद्र विकसित करना।

2. महिला पंचायत प्रतिनिधियों के साथ संवाद और नेटवर्किंग करते हुए प्रषिक्षण व क्षमता-विकास संबंधी गतिविधियां संचालित करना।

3. विभिन्न सरकारी योजनाओं तथा प्रषासनिक कामकाज की पद्धति के संबंध में महिला पंचायत प्रतिनिधियों की समझ व जानकारी बढ़ाना तथा इस दिषा में आने वाली बाधाएं दूर करना।

4. पंचायती राज की सफलता से जुड़े अनुकरणीय उदाहरणों तथा सफल प्रयोगों का दस्तावेजीकरण व प्रकाषन करके जनसंचार माध्यमों द्वारा उनका प्रचार-प्रसार करना तथा ऐसे उदाहरण दिखाने के लिए महिला पंचायत प्रतिनिधियों का भ्रमण आयोजित कराना।

5. पंचायती राज से जुड़े कानूनों, नियमों, परिपत्रों, ग्रामीण विकास योजनाओं, कानूनों इत्यादि के संबंध में जानकारियों का संकलन व प्रकाषन करना ताकि पंचायत प्रतिनिधियों व समुदाय को आसानी से इसकी उपलब्धता हो।

6. ग्रामीण विकास संबंधी प्रमुख योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के माध्यम से मिलेनियम डवलपमेंट गोल हासिल करने की दिषा में महिला पंचायत प्रतिनिधियों का तकनीकी एवं प्रषासनिक क्षमता विकास करके उनकी क्षमता बढ़ाना।

हमें चाहिए आपकी मदद

राज्य में पंचायती राज को सफल बनाने और ग्रामीण विकास के लिए प्रयासरत सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों, संस्थाओं, पंचायत प्रतिनिधियों व अन्य जनप्रतिनिधियों एवं मीडियाकर्मियों का सहयोग हमें चाहिए। हमें विभिन्न सरकारी व गैरसरकारी संस्थाओं, कारपोरेट घरानों, शोधकर्ताओं एवं शैक्षणिक संस्थाओं से भी काफी अपेक्षाएं हैं।

आप इन तरीकों से हमें मदद कर सकते हैं-

1. पंचायत महिला प्रतिनिधियों के प्रषिक्षण एवं क्षमता-विकास हेतु हमारे साथ साझा कार्यक्रम आयोजित करना।

2. पंचायत राज की सफलता एवं नये प्रयोगों संबंधी जानकारी, स्टोरीज, तसवीरें, सीडी इत्यादि उपलब्ध कराना और वितरण हेतु अपनी प्रचार सामग्री प्रदान करना।

3. पंचायत महिला प्रतिनिधियों हेतु एक्सपोजर विजिट आयोजित करना।

4. पंचायत राज संस्थाओं एवं अधिसंरचना को मजबूत करने में मदद करना।

5. पंचायत राज से जुड़े कार्यक्रमों तथा ग्रामीण विकास योजनाओं में महिला प्रतिनिधियों की प्रभावी भूमिका हेतु संसाधन उपलब्ध कराना।

झारखंड पंचायत महिला रिसोर्स सेंटर के सहभागी
राज्य ग्रामीण विकास संस्थान, साउथ कैंपस, काजू बगान, हेहल, रांची - 834005
यूनिसेफ, झारखंड कार्यालय, विश्वा हाॅस्टल काॅम्पलेक्स, जोड़ा पुल, कांके रोड, रांची- 834006

झारखंड राज्य महिला आयोग, इंजीनियरिंग हाॅस्टल, गोलचक्कर के पास, धुर्वा, रांची - 834002
मंथन युवा संस्थान, थर्ड स्ट्रीट, हिंदपीढ़ी, रांची - 834001

Friday, 20 July 2012

JPWRC to empower women in panchayats

The Jharkhand Panchayat Women Resource Centre (JPWRC) will empower newly elected women panchayat members in Jharkhand, said Hemlata S Mohan, chairperson, Jharkhand Women Commission (JWC) at the State-level workshop on the issue of decentralisation in Jharkhand on Monday.
Jharkhand Legal Services Authority (JHALSA), Jharkhand Women Commission (JWC), UNICEF and Manthan Yuva Sansthan have partnered for JPWRC that will orient and empower large number of newly elected women panchayat members.
“We will create platforms to share experiences, provide capacity building opportunities to newly elected women panchayat members and provide thematic exposures on water and sanitation, nutrition, child protection and other like issues. The Centre will also facilitate campaign on women and child related issues at village level through women PRI members,” said Deepak Kumar Dey, Planning Monitoring and Evaluation Officer, UNICEF, Jharkhand.
“The State had reserved 50 per cent of the seats for women in the Panchayat election. However, 57 per cent of the elected representatives in Jharkhand are women. Most of these elected women representatives belong to marginalised communities and are from poor economic background. They are new entrants in the grassroot politics and governance system calling for a mechanism to orient and empower them,” informed Sudhir Pal, secretary, Manthan Yuva Sansthan.
According to Ashok Bhagat, president, Vikas Bharti,   the panchayat elections have ensured empowerment at rural level by reducing the cases of corruption by almost 40 per cent. An increase in the number of implementation of Government sponsored schemes at grassroots level after the formation of panchayat has also been noticed.
More than 60 participants from various NGOs, Panchayat Head and senior Government officials participated in the day-long workshop. The participants shared their experience on decentralisation and empowerment of panchayat in State during the workshop.
(The Pioneer, Monday, 26 March 2012)